किसी नन्हे बच्चे की मुस्कान देख कर कवि ने क्या खूब लिखा है दौड़ने दो खुले मैदानों में , इन नन्हें कदमों को साहब .!
जिंदगी बहुत तेज भगाती है ,, बचपन गुजर जाने के बाद .!! � गौरव कुवाल
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